we the people of earth

There are certain questions before every one how to live with peace & bliss, I want make it clear that my A to Z blogs in blogger.com have answers for all questions and if there may be new questions. I will answer whatsoever it may be. My purpose on my blog site is written  on blogs. My blog site is – krishnansh771.blogpost.com, I think people interested may follow me.

Thanks in advance you all respected n love able wise persons

yours’

M. Jahangeer

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it is the fact

इतिहास गवाह है कि आज जीतनी आबादी इस पृथ्वी पर है उससे कई हजार गुणा लोग लौकिक धर्म की भेंट चढ़ चुके है फिर भी इन अतिवादियों की भूख नहीं गयी जिनका लक्ष्य सत्ता,धन और बाहु बल ही रहा है | ये 99% आम लोग पहले भी शोषित थे आज भी शोषित हैं पीढ़ियों से आस लगाये इन्ताजार कर रहे हैं मुक्ति का , लेकिन सत्ता-धन-बाहु बल पर कब्ज़ा जामये लोग इनको मुक्त होने ही नहीं देना चाहते हैं | इनको जीवन से मुक्ति, अपना हथियार बनाकर ज़रुर दे देते हैं | ये गुलाम थे , आज भी हैं , भविष्य में भी गुलाम ही रखना चाहते हैं |  यह है आज तक के धर्मों की सत्यता ||

-एम. जहाँगीर     +91-9785018474/+919782988474

krishnansh771@gmail.com

प्रलय की प्रक्रिया

पूरी मानव जाति शरीर को बहुत महत्व देती आई हैं जिसकी साफ-सफाई पर ध्यान देते हैं और उसके दिमाग-मन-त्वचा पर ध्यान केद्रित रहता है लिकिन हमारे श्वांस में सारे शरीर का अस्तित्व टिका है उसको हम महत्त्व ही नहीं देते | यही भौतिकता का जगत है जो स्थिर नहीं है | जो श्वांस पर टिक गया उसके अधीन सारी भौतिक-अभौतिक संपत्तियां हो जाती हैं यह ज्ञान हमें वैदिक शास्त्र देते हैं लेकिन भारतीयों के कालांतर पुराणों में यही बात कथा रूप में दी गई हैं |

मज़े की बात यह है कि भारत के अध्यात्मिक जगत में धर्म घुस गया, सत्य-अहिंसा-प्रेम नदारद हो गया और परमात्मा का स्थान देवी देवताओं ने ले लिया जिसके बारे में श्रीमद् भगवद्गीता में के नवम अध्याय में कृष्ण कहते है कि


येऽपयन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्राद्धयान्विटा: |
तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूरावाकम् || 23/9


कोन्तेय! श्रद्धा से युक्त जो भक्त दूसरे – दूसरे देवताओं को पूजते हैं , ये भी मुझे ही पूजते हैं; क्योंकि वहाँ देवता नाम की वस्तु तो होती नहीं है ; किन्तु उनका यह पूजन अविधिपूर्वक है , मेरी (ईश्वरीय स्वरुप) प्राप्ति की विधि से रहित है | जिस जगह कोई सत्ता नहीं है उस जगह तुम जाते हो फिर भी मैं तुम्हारी आस्था को उस जगह घनीभूत करता हूँ और फल भी देता हूँ लेकिन वो सब नाशवान हैं | क्योंकि सनातन धर्म भौतिक की जगह अध्यात्मिक उन्नति के लिए बना है | सनातन धर्म ने 84 लाख योनियों से छूटने का साधन दिया है जिससे ” पुनरपि जन्मं पुनरपि मरणं ” से छुटकारा दिलाने की राह बनती है और यह राह सिर्फ वही पकड़ सकता है जो मनुष्य है जो बन्धन रहित है | जिसने तय कर लिया है, तो वह वह साधू सामान स्वयमेव हो जाता है | इसमें किसी वर्ण या योनि का वर्गीकरण नहीं है |
श्वांस की साधना हमारे भीतर स्थित परमात्मा तक जाने का रास्ता है यही पूजा की सही विधि है जो जीवित मुक्ति के स्तर तक ले जाती है और जो इस पर टिक गया उसको शांति व आनंद का अनुभव हो ही जाता है | लेकिन प्रतक्ष्य तो शरीर ही है इसलिए चिंताएं घेरती हैं और जीने का आनंद और शांति कोसों दूर रह जाती है और आखिर में चिता तक मानव पंहुचने को होता है तब वह दान-पुण्य आदि धार्मिक आयोजनों में बढ़ – चढकर भाग लेने लगता है तब तक बहुत देरी हो चुकी होती है | जीवन भर कमाया खाया और बचाया लेकिन मौत के भय से अपने स्वस्थ बने रहने के लिए बचाया था वो भी खर्च कर चुका होता है |
गीता इस बात को मानव के सभी स्तरों की व्याख्या करके यह समझने में सहयोग करती है कि हम अपना जीवन भय मुक्त कैसे जियें, यहाँ से मुक्ति का पहला सोपान बनता है | आप मंदिर-मस्जिद-गुरूद्वारे चर्च या कोई अन्य भी आपकी आस्था के केंद्र हो, वहां बेशक जाएँ लेकिन कोशिश करें अपने भीतर ही परमात्मा का या जिस एक मात्र ईष्ट की आराधना भी वहां जाकर करते हैं उसको अपने भीतर के मन मंदिर में भी श्वांस के साथ योग करने का प्रयास करेंगें तो फिर आप अपने में ही स्थित हो जायेंगें और यही असली आराधना-साधना हो जाएगी | उसके बाद सब कुछ लोक दिखावा सा महसूस होने लगता है यहीं से आध्यात्म की पृष्ठ-भूमि तैयार होने लगती है |
महाराज जी श्री प्रेम रावत ने अपने एक प्रवचन में कहा है ” जो पूजा की जाती है वह लगभग अपने मन की पूजा करते है लेकिन परमात्मा की पूजा कहां हुई|” क्योंकि हम अपनी आकांक्षाओं की पूर्ती के लिए पूजा करते हैं और पूजा के समय मन इन्हीं में घूमता रहता है | मन जो शरीर की ज़रूरतों में उलझा रहता है | जो कभी ख़त्म न होने वाली लालसाओं के पीछे दौड़ता रहता है, यही नरक है |
आज विकास के नाम पर आदमी ने संघर्ष और विनाश का रास्ता चुना है तो स्वर्ग की जगह दुनियां नरक के रास्ते चल रही है |अभी हाल ही में सयुक्त राष्ट्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तपन बढ़ने वाले कारणों पर रोक नहीं लगी तो पृथ्वी निकट भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं में घिर सकती है जिसका उस समय कोई निदान करना असंभव हो जायेगा | नरक के अनुभव लोगों को होने लगे हैं जो शरीर पर टिके वे इस स्थिति को ओर भयावह बना देंगें | तपन को बढ़ाने वाले उपकरणों को तुरंत प्रभाव से रोका जाये | इसमें ग्रीन हाउसेज, एयर कंडीसन के साधन, विद्युत् उत्पात के नये – पुराने तरीके, वाहनों को ही तेल मुक्त करें इसी प्रकार के छोटे बड़े रूप के साधनों से पृथ्वी मुक्त होगी तो तापमान में परिवर्तन अवश्य होगा | इससे अनावश्यक शोर भी रुकेगा | पेड़-पौधों को सरंक्षण मिले और अधिक से अधिक पेड़ उगाये जाएँ |
मानव जाति को बचाना है तो शोर-गुल करने वाले उपकरणों पर रोक लगे, सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए, सत्ता में बने रहने के लिए प्रचार हेतु, धार्मिक होने का दिखावा करने के लिए भयंकर शोर करके मानव सहित छोटे से लेकर बड़े जीवों को पागल व अर्धविक्षिप्त होने को मजबूर न करें | इसी कारण रिहायसी इलाकों से पशु-पक्षी, जीव-जन्तु पलायन कर रहेहैं और कई प्रजातियाँ समाप्त भी हो गई हैं |
प्रकृति ने जो कुछ भी बनाया है और परमात्मा ने सरंक्षण दिया है वह एक प्रकार से प्राकृतिक संतुलन बनए रखने का तरीका है | पिछले 400 सालों में इस संतुलन को इन्सान ने अपने, सिर्फ अपने लाभ को ध्यान में रखकर विकास के नाम पर विनाश की राह पकड़ी थी जो अब और भी विकराल रूप लेने जा रहा है |
जिस ज्ञान पर विज्ञान घमंड कर रहा है वह तो भारतीय आर्ष ग्रंथों में पहले से ही वर्णित है जो परमात्मा की प्राप्ति के दौर में भारतीय आर्ष ग्रंथो के रचियताओं को यूं ही मिल गया था उसको वैज्ञानिकों द्वारा भौतिक साधनों से प्राप्त करने का आधा-अधूरा प्रयास है और विनाशकारी भी है | परमात्मा से सब कुछ सुलभ है उसकी जगह भौतिक साधन अपना कर मानव जाति संकट में फंसती जा रही है |
जिसे मनुस्मृति में प्रलय कहा है वह दो प्रकार का हैं जो पूर्णत: वैज्ञानिक है
(1) एक प्रलय प्रति क्षण हो रहा है जिसको चिकत्सक कहते हैं कि बच्चे से लेकर वृधावस्था तक मानव शरीर में बॉडी-सेल बनते और ख़त्म होते रहते हैं | उसकी रफ़्तार बाल्य अवस्था में तेज होती है और ज्यों ज्यों वृद्ध होते जाते है मिटने की रफ़्तार तो स्वाभाविक ही होती है लेकिन बाद में पुन: निर्मित होने की रफ़्तार घटने लगती है और जीव मृत्यु को प्राप्त होता है | प्रत्येक जीव की जीवन की लम्बाई अलग – अलग है और उनके जीवन का आखरी पड़ाव अलग – अलग है | यह भारत के आर्ष शास्त्रों में वर्णित है | वैज्ञानिक इसमें अकारण ही प्रेक्षण कर मानव जाति को घोर संकट में डाल चुके हैं |
(2) जब पूरे ब्रह्माण्ड के एक हिस्से पृथ्वी पर ध्यान देते है तो एक सत्य सामने आ रहा है कि जिस संतुलन से प्रक्रिया चल रही थी उसको अप्राकृतिक तरीके से मानव ने रफ़्तार में बदल दिया ( जैसे बॉडी-सेल की प्रक्रिया में तेज , उसके बाद धीमी गति से थी जो स्वाभाविक थी ) नतिज़ा हमारे सामने है कि विकास की गति तेज होते ही मानव जाति संकट में आ गई | प्राकृतिक प्रक्रियाओं में दखल का यही नतीज़ा होना था | प्रकृति के विरुद्ध चलना, आपसी व्यवहार में कई स्वार्थों के चलते संघर्षों को जन्म देना कमजोर से लेकर शक्तिशाली तक की आदत में सुमार हो चुका है और यह 400 सालों की विकास (विनाश) की यात्रा का नतीजा है | यह प्रलय का संकेत है जिसे गोष्ठियों और सम्मेलनों से रोकने का नाटक मात्र हो रहा है | व्यक्तिस: भी और राष्ट्रों के स्तर पर कमजोर और शक्तिशाली एक ही स्वाभाव के दिख रहें हैं | विनाश इसका अंतिम सत्य है |
यहाँ नुट्रीलाईट फ़ूड सप्लीमेंट बनाने वाले व्यक्ति को वैज्ञानिक ही कहूँगा और उसी ने यह विचार दिया और जेवान एंडल और रिच डीवोस ने जो इस कोर्पोरेशन के संचालक थे, इन संचालकों ने नुट्रीलाईट फ़ूड सप्लीमेंट प्रोडक्ट्स को दूर दृष्टि से बेचना शुरू किया क्योंकि भविष्य में मानव जाति को शुद्ध कुछ भी नहीं मिल पायेगा | ये प्रोडक्ट एक तरह से आज मानव जाति के लिए वरदान सिद्ध हो रहे हैं यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी है |
इसी तरह आज सनातन धर्म के आर्ष ग्रंथों से जीने की तलाश संभव है यदि मानव चाहे तो ही | इसके लिए प्रकृति से छेड़-छाड़ बहुत हो चुकी अब इस प्रकृति के अनुसार चल कर ही पृथ्वी को बचाया जा सकता है | यह बात 1988 में श्री भागवान प्रजापति ने अपने अखबार खेजड़ा एक्सप्रेस ( पाक्षिक ) में लिख दिया था और आज भी वह एक पेज में लगातार 30 साल से लिखते आ रहे हैं लेकिन भारत की सरकार ने और विश्व की किसी संस्था ने गौर करने का कष्ट ही नहीं किया | जबकि आज U.N.O पृथ्वी की उम्र 12 साल बता रहा है इस चेतावनी के साथ कि यदि पृथ्वी का तापमान इसी रफ़्तार से बढ़ता गया तो गर्म हवाएं चलेंगी, ग्लेशियर पिग्लेंगें, समुद्र का जल स्तर बढेगा, कई टापू डूब जायेंगें, यह जल पृथ्वी पर फैला तो भरी तबाही होगी, सूखा पड़ेगा, अकाल की स्थिति होगी, पृथ्वी भी अपना संतुलन खो देगी | यह मनुस्मृति के अनुसार प्रलय जो जीवों की प्रक्रिया में होता है तो अब सामूहिक रूप से होगा इस पृथ्वी ग्रह पर तो इसको क्या कहोगे ? प्रलय ही तो होगी |
जब परमात्मा को धोखा देने का भी प्रयास होगा लेकिन मौत जब पीछा कर लेती है तो कहीं भी छिप जाना वह वहां से भी घसीट लाएगी | अब समय व्यक्तिगत बचाव का नहीं सामूहिक बचाव का ही एक मात्र रास्ता बचा है | इसके लिए पहल कौन ? कब ?कैसे शुरू करेगा ? इस पर ही निर्भर करता है |
ओउम ही एक मात्र सहारा है |
ओउम शांति !!!
m, jahangeer

सत्य यह है

आज मुख्य मुद्दा यह हो गया है कि पृथ्वी को बचाने की चिंता किसको है, शायद किसीको भी नहीं | क्योंकि दुनिया में शासन व्यवस्था भारतीय सन्दर्भ में वैदिक आर्ष ग्रन्थ मनु स्मृति पर आधारित होनी चाहिए जिसको श्री कृष्ण ने महाभारत काल में पुन: दोहराया श्रीमद् भगवद्गीता के रूप में | लेकिन इसका अनुसरण न भारत में हुआ और पश्चिमी देशों के लिए आम आदमी तक इसकी सही जानकारी और व्याख्या पहुंची ही नहीं है तो अनुसरण कौन -कैसे करेगा ? ये शास्त्र दकियानूसी या धार्मिक स्वरुप तक ही पहचाने जाते रहे हैं | इनके सन्दर्भ में आध्यामिक मात्र केंद्र ही स्थापित हुए हैं |

क्योंकि ये ग्रन्थ आज के सन्दर्भ में पृथ्वी के प्रर्यावरण की सुरक्षा की दृष्टि से महत्त्व पूर्ण हैं जिनके प्रति समर्पण जरूरी है इससे पूर्व विकास की गति को रोकना ही जरूरी है , केवल उन क्षेत्रों को पूर्ण रूपेण रोकना ज़रूरी है जिनसे तापमान बढ़ रहा है या शोर बढ़ रहा है | कुछ हद तक हवा की शुद्धता के लिए उर्जा  के विकल्प खोज कर इस्तेमाल शुरू करेंगें तो बहुत जल्दी पृथ्वी को रहत पहुँच सकती है ऐसा मेरा मानना है लेकिन इसको स्वीकार वो लोग तो कभी नहीं करना चाहेंगें जिनकी पूँजी का आधार ऐसे प्रोडक्ट हैं , खैर 

मैं कोई दकियानूसी विषय पर जोर नहीं दे रहा हूँ बल्कि वो सत्य उजागर कर रहा हूँ जो यूनान के विचारक प्लेटो ने उजागर किया था | प्लेटो ने शासन व्यवस्था के बारे में जो कहा था उसी पर पश्चिम में सामाजिक समझौते के सिद्धांत पर होब्स – लाक- रूसो ने शासन व्यवस्था पर अपने दृष्टि कोण दिए थे  |  उसी पर हरबर्ट स्पेंसर , हीगल , कांट, मार्क्स ने उच्चतर शासन व्यवस्था की बात की थी जिसका सार यह था  कि पूँजी के लिए संघर्र्ष जारी रहेगा और एक दिन पूँजी किसी एक व्यक्ति के पास जमा हो जाएगी | उस समय बाक़ी लोग मजदूर रह जायेंगें रह जायेंगें और एक अराजकता की स्थिति होगी | जो परिवर्तन का आखिरी स्वरुप होगा | वह पूँजी समाज की हो जाएगी | यह अक्षरस: सत्य हो भी जाये तो भी , उसके बाद क्या होगा वह कहीं भी व्यवस्था दिखाई नहीं पडती है |

इसी परिकल्पना पर साम्यवाद का उदय हुआ था जो समय से पूर्व हुआ और समाप्त भी हो गया | यहां प्लेटो सही साबित हुआ कि राज व्यवस्था का प्रजातान्त्रिक स्वरुप एकतंत्र से  राजाओं के राज से जनता के राज में परिवर्तित होगा और वह भी एक दिन मानव की  स्वार्थी  प्रवृति के कारण भीड़ तंत्र में परिवर्तित हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं है , और आखिर में वही प्रजातंत्र अधिनायक तंत्र में तब्दील हो जायेगा | एक तंत्र से बहुतंत्र फिर जनतंत्र की यात्रा बहुतंत्र, भीड़ तंत्र अधिनायक तक पहुँचने की प्लेटो की व्याख्या बहुत महत्वपूर्ण है | दुनिया में लगभग हर देश में यह स्वरुप देखने को मिला है पाकिस्तान में यह कई बार हो चुका है और इसके केंद्र में पूँजी है यहाँ मार्क्स की व्याख्या भी सटीक नज़र आती है |

भारत में मूल मनु स्मृति के 1214 श्लोक ठीक उसी प्रकार थे जिनमें समाज की व्यवस्था को संतुलित बनाये रखने के सूत्र थे लेकिन राज व्यवस्था की कल्पना एकतंत्र की होने पर भी व्यवस्थित थी | कालांतर में समाज के चार वर्ण भी अनेक वर्णों में बन गये और सारे अधिकार क्षत्रिय और ब्राह्मणों ने छीन लिए 1471 नये श्लोक जोड़ कर वैश्य और शूद्रो को दण्डित करने तथा उन पर अंकुश बनाये रखने के लिए अंधविश्वासों का जाल बुन दिया गया जिसको 1947 के बाद संविधान बना फिर भी आज तक जनतांत्रिक व्यवस्था के बावजूद 85% लोग भुगत रहे हैं क्योंकि मनुस्मृति अपरोक्ष रूप से उनका सामाजिक संविधान रहा है और उसका सत्ताधारियों ने जम कर लाभ लिया, उसको वोट बेंक बना लिया |

आज भारत की राजनीति करवट ले रही है इसमें संघर्ष रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स की स्टाइल का है जबकि दुनिया को इन दोनों ने कोई सही मार्ग नहीं दिया | भारत में एक विचार गाँधीवादी भी है जिस पर हो कुछ नहीं रहा है सिर्फ वोट बेंक बनाये जा रहे हैं – गाँधी को बदनाम करके या उसकी पूजा करके | अगर गंभीरता से गाँधी के अनुसार विकास का मार्ग बनाया जाता तो दुनिया भी उसी रस्ते पर चल कर आज के हालत को सुधार जा सकता है | लेकिन ” सत्ता-धन-संपत्ति ” के दीवाने राजनेता व सत्ताधारी लोग अपने स्वार्थ के लिए मनु स्मृति को दकियानूसी धार्मिक तक सीमित रखते रहे और उस में मिलावट भी करते रहे और लोगों को अंधविश्वासों के घेरे से बाहर निकलने नहीं दे रहें हैं|

देशकाल परिस्थिति के अनुसार कुछ किया भी तो वह राजनीति के हथियार रूप में इस्तेमाल भी हुआ और आलोचना के दायरे में ला के खड़ा कर दिया |

सत्य यह है कि देश ही नहीं दुनियां के लिए ये वैदिक आर्ष ग्रन्थ श्रीमद् भगवद्गीता और मनु स्मृति आज रक्षा कवच के रूप में यदि गाँधी के दर्शन को शामिल कर लिया जाय तो दुनिया को नयी दिशा दे सकते हैं बाक़ी तो परमात्मा ही जनता है |

ओउम तत्सत !!!

–एम जहाँगीर           krishnansh771.blogpost.com

We are composition of pyxles.

the people of this planet running for name/fame/money/power/maximum/happiness and are trying make history but they don’t know your past-present-future is result of your decisions. past have projected your present and present decisions will project your future. How much pyxle your allotted for present time are because of your past deeds. It can be seen in present life, too. So-called God have no time to consider you, that is fixed way of nature. If you will desterub it He will degrade your pyxles and you will be part of unknown history. The history you have create is a drama of yours but you don’t know the real one. Vedic scriptures have explained it in so many forms to define it. Latter on history like stories “puran” two epics are, too, Ramayan and Mahabharat are before us but no one have understood it in real meaning. The rulers and their advisers use them to make public ”fool” to rule them as their own desire. Now the climax have come on earth because of dishonesty of human toward nature.

The pyxles …. or…. Atom

Who are you?

Human?

You are because of your diet, nutrition you take in diet?
What is your identity?

You remember you name-caste-religion-nationality that was fed in your mind from birth by your associations

family, educational, workplaces

but

you never try to remember it 24 hours the same.

You reminded by others

but

in real position is that you are simple creature just like others are on this earth.

Who create you?

You are bai product of your father-mother and what is your existence and how?

You are on earth in the form of atoms.

That can be explained the immune system you have been allotted by birth.

I can explain atom as pixels of digital science, in mobiles, computers etc.

As much pixels, the tools have that will be more smooth and attractive.

In photoshop you create a photograph having as many pixels your photograph can be enlarged much wider but

lesser pixel can’t be enlarged much wider.

Why?

In the same manner, the human is on this earth not only living creatures but none living, too.

The scientist has broken the atom (pixel) and come to know there are three parts 1.electron 2. Proton 3. Neutron.

This knowledge has made it possible to use as power and atom bombs.

The scientist stops the experiments to broke these three parts because this was not possible, they turn their research in another side.

Now the digital world has appeared before us which make possible for us the networking and now maximum knowledge is recorded in this form.

We can now create everything which was not possible through photography.


Movie producers create a world which is not on this earth but we enjoy it as regards our interests.

In the same manner, digital science makes it possible which was hard to shoot.

The whole cosmos is created in the form of pixels and the earth is the part of it and we are the part of the earth in form of pixels.

The scientist explains the creation of cosmos. The basic power is sound and light. There is a restless movement in

every part of cosmos and in the same manner on earth and living or none -living, too.

We greedy creature, human, are disturbing its natural process of cosmos system with the louder sound

and

chemicals in the name of physical progress.

The search and aproch to moon/sun/mars etc

We are exploiting human ability and natural resources.

In Vedic philosophy as the scriptures like Vedas, different Yogas, Manusmriti (original), shrimd bhagawd Geeta and Purans just like Bhagwd Puran, the same view of creation is explained.

The Sound is called Oum

and

light is depicted in the form of Sun with certain orbits are around it which control the pixels of earth and it’s living none livings.


As scientists explain that the cosmos is expanding as well as destroying itself constantly, it is maintained, too.


The Vedic theory explains in name of three power
1. creator,

2. maintainer

&

3. destroyer

but they are one that is Oum.

Atom is in itself have three parts electron, proton, neutron that why the great scientist Einstin said the matter is ever it never ends, it simply changes forms.


Vedic philosophy explain it as Maya (physical world) and someone controls it, that is oum and scientists says that is gravitation power which has balanced the whole cosmos. Vedic theory explain it the God is everywhere from cosmos to a body cell atom of matter.

What is controversy? Nothing like it.


The only way of explaining way is different. In yoga, the trainer tress over to enchanting oum (the sound in the manner of science) and every kind of knowledge and report about any space can be acquired

then

why human is running for physical power,

when the whole cosmos is under His control that is within you.


In Mahabharat,

it is explained that a simple arrow has the power of rain, fire, air, and that can follow the target without fail.

Sudarshan chakra was with Lord Krishna.

What it was? The power of enchanting mantra, the script of certain words including oum.

In 1935 a.c few scientists came to Ravindra Nath Tegore to know what the reason after finding neutron, proton, electron we are not in a position to break these elements now.

Tegore explains one script of Brahm sootra which contain the answer of their questions.          

cont…..

— M.jahangeer
krishnansh771@gmail.com

As you show, so, you have to reap

              Your deads are following to you. Your name is simple nameplate of your existence just like house-shop etc. your caste is your quality, your carrier is just a reflection of your past birth and deads. After so many births you are here. You are enjoying or suffering it is the result of your history you have maintained your living as good     (lived for others individual or mass) as a bed ( only for himself-mine n your understandings individual or mass).

             The Bharateey scriptures have explained it according to there words:-

Bouddha-

Every one’s life is the result of his former life, one’s former lifes’ mistakes evident now as suffering and pains. Where as earlier good deads show their benedictions.

Mahabharat-

The ruler and master of this cosmos have established the fortunes of all beings as well as their happiness and sorrow according to their previous lives.

Just like a calf can finds it’s a mother among the thousands of cows, the previous deads follow on heels of their perpetrators.                                

Upnishad-

One becomes what one thinks, speaks and work. That is the whole secret.

               The physical and worldly progress with the help of science and technology it happens in the western world not eastern. Why? Western were religious but not having scientific knowledge of Almighty,

               But in the eastern world, there was a scientific knowledge of Almighty with examples and scriptures. You will wonder when there had been large research over previous life in the east and now westerns are on this way. They are having not hundred but thousands of children remembering their previous birth and they have taken the experts to his last home and recognize his kins-father-mother-son-wife-brother-sister etc. but after 5th yrs, average child forgets his past life. Sleeping child weeping or laughing is the sign of his previous history because he is unknown to present associations than what he is seeing and reacting in deep sleep.

               Hypnotic science of west is going in the depth and giving treatment to such patients who are incurable. They are commanded to go back in the previous life and find the history of lives and according to the history of the patients are cured.

              What is to These are the examples related to Vedic seers research of human race’s true way of analysis of life in scientific view to know the beings’ related to previous life which controls him in this birth. You may destroy your future birth with the association in present life though you are enjoying it with all facilities but what will be your next birth as 84 lac form of creatures.

               The heaven is in your hand here on this earth but no freedom and choice of next birth. But if you follow the truth of Sanatan Dharm you may save yourself and planet, too.

                Every human ( all kinds of beings ) are in search of PEACE-BLISS, not sorrow or struggle but it is on earth. This thirst of betterment (only peaceful n blissfull life) is prevailing to more n more advancement that is creating nothing only leading toward the end of civilization.

              Now it is up to the peoples and it’s leaders to decide which better for this planet. You have to decide not He. He Himself never take action but as per your dicision, you choose. The future will come before you within 100 years.      

Oum tatsat !!!

M.Jahangeer

What soever I have writen

                      

Air-Water-Fire-Sky-Earth-sun-moon-stars. He is so far and so close to us. It is up to our Miss guided Mankind         

  Sanatan dharma always tresses over to let turn human to realize himself and connect with Almighty and get freedom in living with peace and bliss.

    It is well understood in the Vedic period that animals, birds, and all creatures start – loving each other but ends it on sexual activity – which is endless if this tendency of loving diverted toward Almighty than human will become a god himself/herself but it is not happening on earth.

    Fear of insecurity create human, family, society, states, and nations through so many seers prophets, masiha, incarnations had come on earth to guide humanity to be linked with the almighty but as this guidance have given some passwords to connect Him but human forget the passwords but few rituals are fetched by human race and now see , the history of human race, no one was following these guides passwords.

    If it happens on this earth, there may be no sorrow or struggle. Now the situation has become so odd. There is still some person knowing the technic- how to remember that password which is yours but physical prosperity has made all people blind. Last 400 years are the years of progress but it is the mentality of human beings is just like a little child who is playing with a toy and become bored. Every day new changes are done by suppliers who are in the market looking toward intelligence who can renovate the project, the instruments way of treatment for people who are unhealthy, uneasy in life but one password can solve every problem of all kind of people.

    For what scientists inventing, researching the easy life, safety, joyful living but the center of it is peaceful life, blissful life. As regards famous scientist Stephen Hekin, “it had become too hard for peoples to live on this earth and within 100 years the earth will get its end, where will go the peoples of this planet?”

    If peoples of earth stop the easy going life and save nature, the environment will change and automatically. If all easy going life instruments destroyed, all the experiments and work of so-called progress stopped and go close to nature, grow trees,  if loud sound will be controlled, all-time silence will be improved. if peoples follow themselves and search the god inside not in worship places without any sound, I am sure they will enjoy peace and bliss. Which is supposed in worldly progress, It is nothing but a falls vision created human mind. Because of it, nature is disturbed, some greedy person who wants to collect wealth and ” this wealth has not been taken by any with them at the last stage of death ”. Pyramids are the example of it and the whole world knows that when Sikander of Greece is an example before us when he was about to die he said to his persons ” my hands must be out of coffin so that people must acknowledge that Sinkander has gone empty-handed at last.” We can see around us those who were millioniors or wealthy have not taken with them a single penny with them after death. What he was that is explained after him only, he was good or bed man or nothing to talk about.

              The death is sure and everyone has to go empty-handed and the wealth can’t stop it then why this suicidal act is going on and for what? I am not a saint or incarnation of Him but experiences have prevailed me to write this for the sake of human beings. I don’t want any reward against it. Two things must be controlled one is Ego, the second is greediness. These will prevail to human to creat falls visions and will create fire and this fire will destroy the whole which is gained. Please note three things are not in the hand of human that is life & death, profit & loss, fame & defame.

               All the leaders and rulers of the peoples of this planet are advised to take reverse actions they have taken in the name of progress, it is necessary to save this earth. It is ever truth ( Sanatan Dharm-eternal philosophy ) rule of Him must be followed. You all have developed the mentality to become powerful to grab most of the earth under you because you have developed too much advance weapons like atom bombs n ultraviolet rays etc. but you forget you can’t use that if by mistake someone click it the others are ready to click and you have stored these which can destroy the planet 50000 times. You yourself are afraid of it.

                 So please come to the way of truth, non-violent, love and surrender before Him who is watching the reality of ours that is how much longer is. You don’t know the next moment can change the situation. Yours’ alertness through your instruments is meaningful for you but not for Him. You must realize it, otherwise, He will make such changes in your mind, physical existence, natural phenomena so much intolerable you will cry for help but He will prove Himself that there is no God to help you.

                 It is a simple description of His power because scientists in the western world don’t believe in God as Hekin has expressed at the last stage of life. It is fact that rituals are not God. He Himself is Truth. All gurudom is false. He Himself is mighty with non-violence. All visions are falls but He Himself is fact who loves we all.

                All religions have guidelines to know Him, worship Him but it was misinterpreted by some greedy and egoist persons that our religion is better than any others. The reality is God, you may call Him in any way, name as regards your understanding or mother tongue. He is just like feelings. Without Him, all religions are a social or political organization, not more than the group of people only. If we shall behave like the organization we have created Hell on earth and we have to suffer and suffering and will suffer after death, too.

                Religious institutions are pleading for Him that means He is so helpless that He requires help from a human, he wants the support of human? He who created the whole cosmos is waiting for your help? Knowingly extremist are pleading for Him for what? Basically, something is behind it, their acts are in the name of Him only.

              It is necessary and compulsory for us if we love Him and respect Him that means we are loyal to Him than we must save His creations living-none living or any form it will help us to create peace and bliss for all. Overexploitation of nature, scientific experiments, the latest weapons are the sign of an invitation to dissasters. He can use nature in what way He may do. So we must first stop the all activities which are unblancing the environment. It will create over rain, drought, tsunami, earthqueck, unknown diseases and unwanted death on earth constently but all government and social orgenizetion will become helpless.

Oum tatsat !!!

M.Jahangeer

Maybe people will listen to David Attenborough about climate change

It is fact that Christ appeared on earth to save Humanity but people fetch him but not following in real sense because His message of “Love” means love for all living and none living (as understand about nature) is ignored Why not we come back to nature and stop the materialistic progress live with Him, the real father of us that is explained and understood in different names and symbols but He is one. He has a too much soft heart for us but we are too much cruel in all sense. We are fighting for ”My-Me-Mine” but the reality is that nothing is yours’, this nature is a gift of Him for all in equal shares but some greedy persons are destroying it for the sake of “My-Me-Mine” that’s why whole earth and human beings are facing natural disasters around the world. from 1988 the newspaper fortnightly is writing over this issue but no one give him support by India Govt as well as whole world government Now UNO have warned over the same issue few people are calling to do something otherwise the present civilization will reach to its end. Wish you the best of luck.

Why Evolution Is True

Right now we are facing a manmade disaster of global scale, our greatest threat in thousands of years: climate change.
If we don’t take action, the collapse of our civilisations and the extinction of much of the natural world is on the horizon.
—David Attenborough

Some research has shown (I can’t be arsed to find it) that people tend to most trust the advice and beliefs of those considered members of their “tribe.” Well, who doesn’t see David Attenborough a member of their tribe?  A few days ago, as The Guardian reports, there was a United Nations climate change summit in Poland, and Attenborough was chosen to be the one representative speaking for the world’s people as a whole. That’s a big responsibility! And he’s 92 years old.

As part of that summit, and to inform Sir David’s address, messages from many people were collected. Buttressed by their views…

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ASTROLOGY – 1

                           ASTROLOGY - 1                            
            The human has to get birth and the last destination is death, in this span of life to death average human fights for whole life to gain and the main things to fetch is what? 
            1st is to get maximum he can make available for himself whatsoever he can visualize, the best one of each in the shape of money-power-enjoyments etc so on. That is called profit, But everyone can't get at all. there may be so many remain empty hand, it is up to Him (unknown to the layman, still).
           2nd is name-fame n to avoid defame, it also in the hand of Him.
and
           3rd is to live longer but death is the last destination for all, it is not in the hand of living on how much longer he can live, exceptions in India the spiritual worlds' master are in Himalaya are living more than hundred-thousand years. 
            We the pitiable human from birth to death try most for us - may get ''profit or loss''   /  fame or defame  /and to live as much we want to live. It is not possible for everyone because there is a remote behind us, under His control.
           If someone goes to search Him but it is not possible for everyone though it is too, easy, as regards the basic concept of Vedic. Every respectable soul had appeared on earth, having that technic given in our old scriptures more than 5000 yrs before or older time, it is subject of research.
           Every one on this earth is in search of peace and bliss but they forget the game they have played in their life or before birth (you're a reincarnation of last birth whatsoever it may be) you're facing in present and the game you're playing in this birth will project in your future.
          People go to Astrologers whose search is money, they don't give you any authentic guideline which can solve your questions or problems because they himself are miss-understood. They don't know even their own future. They are meant for Astrology so they are serving people to earn money, they are, too, under control of His remote, later on, they become mad or left this work. 
           As regards Astrology I have a long experience and become a victim of it. I collect knowledge and found that average maximum 60% result may help you but not certain. So many Astrologer gives you a sweet toffee, nothing else. Average it is a study of the psychology of the client.
          But as long I go ahead to know the fact, through a temple when my last Astrologer indicates me to go to one temple of Ganesh, that is to be decided by me that one temple. I decided to worship the Lord, who gave me that guideline indirectly through chances and so many knowledge of Aryan scriptures, just like the great pioneers of Vedic spiritual science and books of seers and which has a real study of human nature. Manu Smriti and Shrimd Bhagawd Geeta, Shrimd Bhagawd Puran have explained the few basic ways of human working and thinking including ultimate results of the acts (the Karma through thinking-speaking-acting in way of life), too. In the last chapter of Shrimd Bhavwd Puran ends with the proclamation of Lord Krishna " what decision you have taken and have acted in present you have to face the result in future of the same, good or bad, no one can help you to change it." 
          It makes one thing clear to me and helps me to understand when I read the book translated in the English language by late Shri Maheshanand Ji Maharaj a saint " Brahm Sootra with interpretation " of Adi Shankaracharya which was Sanskrit to Sanskrit. It has so many examples and a condensed view is "This world around us is just like a movie and we ourselves are the part of it and you can't change the link of stories around us". Those who are above the average human can know the whole film of past-present n future. But it is also a fact that every soul of every human and living creatures know their past-present and can know future but they are not in the position to do so, many times so many people speak out after seeing present situation that it was near about in my knowledge that it will happen in future and it is happening today. In the same manner, every human is in this position but they can't know and explain in such manner as the seers can. So to know yourself please try to understand our scriptures. If someone read only one original scripture with complete faith and eagerness he will reach the level of intelligent student and after being conditioned of that knowledge he will proceed toward the real goal.
             One thing I want to make clear don't plead or oppose for any belief which followed by you or not and someone follows other than yours. Every great soul (Prophets-Seers-Guru) have given guidelines to their followers "the same knowledge which is understood by them, the way may differ must target is to let people know Him, not to be attached with any way you follow.
        I will finish my blog with the reference of Acharya Rajneesh. He speaks in his lecture "someone (Great souls) said that is the moon indicating by his hand toward the moon, it is bad luck of us we never try to see and understand the moon but we are hanging around the hand of the great soul." 
        As I always say God is one, we have given Him name according to our language that not means God is different as regards language or way of worship and dress code.
       Best of Luck for all who are reading or viewing or not.