it is the fact

इतिहास गवाह है कि आज जीतनी आबादी इस पृथ्वी पर है उससे कई हजार गुणा लोग लौकिक धर्म की भेंट चढ़ चुके है फिर भी इन अतिवादियों की भूख नहीं गयी जिनका लक्ष्य सत्ता,धन और बाहु बल ही रहा है | ये 99% आम लोग पहले भी शोषित थे आज भी शोषित हैं पीढ़ियों से आस लगाये इन्ताजार कर रहे हैं मुक्ति का , लेकिन सत्ता-धन-बाहु बल पर कब्ज़ा जामये लोग इनको मुक्त होने ही नहीं देना चाहते हैं | इनको जीवन से मुक्ति, अपना हथियार बनाकर ज़रुर दे देते हैं | ये गुलाम थे , आज भी हैं , भविष्य में भी गुलाम ही रखना चाहते हैं |  यह है आज तक के धर्मों की सत्यता ||

-एम. जहाँगीर     +91-9785018474/+919782988474

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where is heaven

                   ” स्वर्ग ” स्वर ” में स्थित है – ”नरक”  ”शरीर ” में स्थित है

पूरी मानव जाति शरीर को बहुत महत्व देती आई हैं जिसकी साफ-सफाई पर ध्यान देते हैं और उसके दिमाग-मन-त्वचा पर ध्यान केद्रित रहता है लिकिन हमारे श्वांस में सारे शरीर का अस्तित्व टिका है उसको हम महत्त्व ही नहीं देते | यही भौतिकता का जगत है जो स्थिर नहीं है | जो श्वांस पर टिक गया उसके अधीन सारी भौतिक-अभौतिक संपत्तियां हो जाती हैं यह ज्ञान हमें वैदिक शास्त्र देते हैं लेकिन भारतीयों के कालांतर पुराणों में यही बात कथा रूप में दी गई हैं | इनमें विभिन्न शक्तियों का उदाहरण देकर समझाने का प्रयास किया है कि इश्वर से सब कुछ सुलभ है लिकेन लोगों ने व समझाने वालों ने इन देवों की (जो ईश्वर की शक्तियों है) पूजा अर्चना शुरू करवा दी और मूल विचारों में प्रेक्षण कर दिया, इसी कारण से ही इस मूल तथ्य ईश्वर को भ्रष्ट करके भौतिक प्रक्रियाओं में भारतीय उलझ के रह गये और अंधविश्वासों की मान्यताओं के जाल में फंस के रह गये और इसी कारण से हम वैदिक सनातन पृष्ठ-भूमि से अलग हो गये | जब तक भारतीय थे तब तक तो ठीक थे लेकिन जब हमें ” हिन्दुस्तानी और इन्डियन ” कहा जाने लगा तब से हम अपने मूल स्वरुप से भटक गये| मज़े की बात यह है कि भारत के अध्यात्मिक जगत में धर्म घुस गया, सत्य-अहिंसा-प्रेम नदारद हो गया और परमात्मा का स्थान देवी देवताओं ने ले लिया जिसके बारे में श्रीमद् भगवद्गीता में के नवम अध्याय में कृष्ण कहते है कि
येऽपयन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्राद्धयान्विटा: |
तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूरावाकम् || 23/9
कोन्तेय! श्रद्धा से युक्त जो भक्त दूसरे – दूसरे देवताओं को पूजते हैं , ये भी मुझे ही पूजते हैं; क्योंकि वहाँ देवता नाम की वस्तु तो होती नहीं है ; किन्तु उनका यह पूजन अविधिपूर्वक है , मेरी (ईश्वरीय स्वरुप) प्राप्ति की विधि से रहित है | जिस जगह कोई सत्ता नहीं है उस जगह तुम जाते हो फिर भी मैं तुम्हारी आस्था को उस जगह घनीभूत करता हूँ और फल भी देता हूँ लेकिन वो सब नाशवान हैं | क्योंकि सनातन धर्म भौतिक की जगह अध्यात्मिक उन्नति के लिए बना है | सनातन धर्म ने 84 लाख योनियों से छूटने का साधन दिया है जिससे ” पुनरपि जन्मं पुनरपि मरणं ” से छुटकारा दिलाने की राह बनती है और यह राह सिर्फ वही पकड़ सकता है जो मनुष्य है जो बन्धन रहित है | जिसने तय कर लिया है, तो वह वह साधू सामान स्वयमेव हो जाता है | इसमें किसी वर्ण या योनि का वर्गीकरण नहीं है |
श्वांस की साधना हमारे भीतर स्थित परमात्मा तक जाने का रास्ता है यही पूजा की सही विधि है जो जीवित मुक्ति के स्तर तक ले जाती है और जो इस पर टिक गया उसको शांति व आनंद का अनुभव हो ही जाता है | लेकिन प्रतक्ष्य तो शरीर ही है इसलिए चिंताएं घेरती हैं और जीने का आनंद और शांति कोसों दूर रह जाती है और आखिर में चिता तक मानव पंहुचने को होता है तब वह दान-पुण्य आदि धार्मिक आयोजनों में बढ़ – चढकर भाग लेने लगता है तब तक बहुत देरी हो चुकी होती है | जीवन भर कमाया खाया और बचाया लेकिन मौत के भय से अपने स्वस्थ बने रहने के लिए बचाया था वो भी खर्च कर चुका होता है |
गीता इस बात को मानव के सभी स्तरों की व्याख्या करके यह समझने में सहयोग करती है कि हम अपना जीवन भय मुक्त कैसे जियें, यहाँ से मुक्ति का पहला सोपान बनता है | आप मंदिर-मस्जिद-गुरूद्वारे चर्च या कोई अन्य भी आपकी आस्था के केंद्र हो, वहां बेशक जाएँ लेकिन कोशिश करें अपने भीतर ही परमात्मा का या जिस एक मात्र ईष्ट की आराधना भी वहां जाकर करते हैं उसको अपने भीतर के मन मंदिर में भी श्वांस के साथ योग करने का प्रयास करेंगें तो फिर आप अपने में ही स्थित हो जायेंगें और यही असली आराधना-साधना हो जाएगी | उसके बाद सब कुछ लोक दिखावा सा महसूस होने लगता है यहीं से आध्यात्म की पृष्ठ-भूमि तैयार होने लगती है |
महाराज जी श्री प्रेम रावत ने अपने एक प्रवचन में कहा है ” जो पूजा की जाती है वह लगभग अपने मन की पूजा करते है लेकिन परमात्मा की पूजा कहां हुई|” क्योंकि हम अपनी आकांक्षाओं की पूर्ती के लिए पूजा करते हैं और पूजा के समय मन इन्हीं में घूमता रहता है | मन जो शरीर की ज़रूरतों में उलझा रहता है | जो कभी ख़त्म न होने वाली लालसाओं के पीछे दौड़ता रहता है, यही नरक है |
आज विकास के नाम पर आदमी ने संघर्ष और विनाश का रास्ता चुना है तो स्वर्ग की जगह दुनियां नरक के रास्ते चल रही है |अभी हाल ही में सयुक्त राष्ट्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि तपन बढ़ने वाले कारणों पर रोक नहीं लगी तो पृथ्वी निकट भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं में घिर सकती है जिसका उस समय कोई निदान करना असंभव हो जायेगा | नरक के अनुभव लोगों को होने लगे हैं जो शरीर पर टिके वे इस स्थिति को ओर भयावह बना देंगें | तपन को बढ़ाने वाले उपकरणों को तुरंत प्रभाव से रोका जाये | इसमें ग्रीन हाउसेज, एयर कंडीसन के साधन, विद्युत् उत्पात के नये – पुराने तरीके, वाहनों को ही तेल मुक्त करें इसी प्रकार के छोटे बड़े रूप के साधनों से पृथ्वी मुक्त होगी तो तापमान में परिवर्तन अवश्य होगा | इससे अनावश्यक शोर भी रुकेगा | पेड़-पौधों को सरंक्षण मिले और अधिक से अधिक पेड़ उगाये जाएँ |
मानव जाति को बचाना है तो शोर-गुल करने वाले उपकरणों पर रोक लगे, सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए, सत्ता में बने रहने के लिए प्रचार हेतु, धार्मिक होने का दिखावा करने के लिए भयंकर शोर करके मानव सहित छोटे से लेकर बड़े जीवों को पागल व अर्धविक्षिप्त होने को मजबूर न करें | इसी कारण रिहायसी इलाकों से पशु-पक्षी, जीव-जन्तु पलायन कर रहेहैं और कई प्रजातियाँ समाप्त भी हो गई हैं |
प्रकृति ने जो कुछ भी बनाया है और परमात्मा ने सरंक्षण दिया है वह एक प्रकार से प्राकृतिक संतुलन बनए रखने का तरीका है | पिछले 400 सालों में इस संतुलन को इन्सान ने अपने, सिर्फ अपने लाभ को ध्यान में रखकर विकास के नाम पर विनाश की राह पकड़ी थी जो अब और भी विकराल रूप लेने जा रहा है |
जिस ज्ञान पर विज्ञान घमंड कर रहा है वह तो भारतीय आर्ष ग्रंथों में पहले से ही वर्णित है जो परमात्मा की प्राप्ति के दौर में भारतीय आर्ष ग्रंथो के रचियताओं को यूं ही मिल गया था उसको वैज्ञानिकों द्वारा भौतिक साधनों से प्राप्त करने का आधा-अधूरा प्रयास है और विनाशकारी भी है | परमात्मा से सब कुछ सुलभ है उसकी जगह भौतिक साधन अपना कर मानव जाति संकट में फंसती जा रही है |
जिसे मनुस्मृति में प्रलय कहा है वह दो प्रकार का हैं जो पूर्णत: वैज्ञानिक है
(1) एक प्रलय प्रति क्षण हो रहा है जिसको चिकत्सक कहते हैं कि बच्चे से लेकर वृधावस्था तक मानव शरीर में बॉडी-सेल बनते और ख़त्म होते रहते हैं | उसकी रफ़्तार बाल्य अवस्था में तेज होती है और ज्यों ज्यों वृद्ध होते जाते है मिटने की रफ़्तार तो स्वाभाविक ही होती है लेकिन बाद में पुन: निर्मित होने की रफ़्तार घटने लगती है और जीव मृत्यु को प्राप्त होता है | प्रत्येक जीव की जीवन की लम्बाई अलग – अलग है और उनके जीवन का आखरी पड़ाव अलग – अलग है | यह भारत के आर्ष शास्त्रों में वर्णित है | वैज्ञानिक इसमें अकारण ही प्रेक्षण कर मानव जाति को घोर संकट में डाल चुके हैं |
(2) जब पूरे ब्रह्माण्ड के एक हिस्से पृथ्वी पर ध्यान देते है तो एक सत्य सामने आ रहा है कि जिस संतुलन से प्रक्रिया चल रही थी उसको अप्राकृतिक तरीके से मानव ने रफ़्तार में बदल दिया ( जैसे बॉडी-सेल की प्रक्रिया में तेज , उसके बाद धीमी गति से थी जो स्वाभाविक थी ) नतिज़ा हमारे सामने है कि विकास की गति तेज होते ही मानव जाति संकट में आ गई | प्राकृतिक प्रक्रियाओं में दखल का यही नतीज़ा होना था | प्रकृति के विरुद्ध चलना, आपसी व्यवहार में कई स्वार्थों के चलते संघर्षों को जन्म देना कमजोर से लेकर शक्तिशाली तक की आदत में सुमार हो चुका है और यह 400 सालों की विकास (विनाश) की यात्रा का नतीजा है | यह प्रलय का संकेत है जिसे गोष्ठियों और सम्मेलनों से रोकने का नाटक मात्र हो रहा है | व्यक्तिस: भी और राष्ट्रों के स्तर पर कमजोर और शक्तिशाली एक ही स्वाभाव के दिख रहें हैं | विनाश इसका अंतिम सत्य है |
यहाँ नुट्रीलाईट फ़ूड सप्लीमेंट बनाने वाले व्यक्ति को वैज्ञानिक ही कहूँगा और उसी ने यह विचार दिया और जेवान एंडल और रिच डीवोस ने जो इस कोर्पोरेशन के संचालक थे, इन संचालकों ने नुट्रीलाईट फ़ूड सप्लीमेंट प्रोडक्ट्स को दूर दृष्टि से बेचना शुरू किया क्योंकि भविष्य में मानव जाति को शुद्ध कुछ भी नहीं मिल पायेगा | ये प्रोडक्ट एक तरह से आज मानव जाति के लिए वरदान सिद्ध हो रहे हैं यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी है |
इसी तरह आज सनातन धर्म के आर्ष ग्रंथों से जीने की तलाश संभव है यदि मानव चाहे तो ही | इसके लिए प्रकृति से छेड़-छाड़ बहुत हो चुकी अब इस प्रकृति के अनुसार चल कर ही पृथ्वी को बचाया जा सकता है | यह बात 1988 में श्री भागवान प्रजापति ने अपने अखबार खेजड़ा एक्सप्रेस ( पाक्षिक ) में लिख दिया था और आज भी वह एक पेज में लगातार 30 साल से लिखते आ रहे हैं लेकिन भारत की सरकार ने और विश्व की किसी संस्था ने गौर करने का कष्ट ही नहीं किया | जबकि आज U.N.O पृथ्वी की उम्र 12 साल बता रहा है इस चेतावनी के साथ कि यदि पृथ्वी का तापमान इसी रफ़्तार से बढ़ता गया तो गर्म हवाएं चलेंगी, ग्लेशियर पिग्लेंगें, समुद्र का जल स्तर बढेगा, कई टापू डूब जायेंगें, यह जल पृथ्वी पर फैला तो भरी तबाही होगी, सूखा पड़ेगा, अकाल की स्थिति होगी, पृथ्वी भी अपना संतुलन खो देगी | यह मनुस्मृति के अनुसार प्रलय जो जीवों की प्रक्रिया में होता है तो अब सामूहिक रूप से होगा इस पृथ्वी ग्रह पर तो इसको क्या कहोगे ? प्रलय ही तो होगी |
जब परमात्मा को धोखा देने का भी प्रयास होगा लेकिन मौत जब पीछा कर लेती है तो कहीं भी छिप जाना वह वहां से भी घसीट लाएगी | अब समय व्यक्तिगत बचाव का नहीं सामूहिक बचाव का ही एक मात्र रास्ता बचा है | इसके लिए पहल कौन ? कब ?कैसे शुरू करेगा ? इस पर ही निर्भर करता है |
ओउम ही एक मात्र सहारा है |
ओउम शांति !!!
m, jahangeer sootradhaar
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Maybe people will listen to David Attenborough about climate change

It is fact that Christ appeared on earth to save Humanity but people fetch him but not following in real sense because His message of “Love” means love for all living and none living (as understand about nature) is ignored Why not we come back to nature and stop the materialistic progress live with Him, the real father of us that is explained and understood in different names and symbols but He is one. He has a too much soft heart for us but we are too much cruel in all sense. We are fighting for ”My-Me-Mine” but the reality is that nothing is yours’, this nature is a gift of Him for all in equal shares but some greedy persons are destroying it for the sake of “My-Me-Mine” that’s why whole earth and human beings are facing natural disasters around the world. from 1988 the newspaper fortnightly is writing over this issue but no one give him support by India Govt as well as whole world government Now UNO have warned over the same issue few people are calling to do something otherwise the present civilization will reach to its end. Wish you the best of luck.

Why Evolution Is True

Right now we are facing a manmade disaster of global scale, our greatest threat in thousands of years: climate change.
If we don’t take action, the collapse of our civilisations and the extinction of much of the natural world is on the horizon.
—David Attenborough

Some research has shown (I can’t be arsed to find it) that people tend to most trust the advice and beliefs of those considered members of their “tribe.” Well, who doesn’t see David Attenborough a member of their tribe?  A few days ago, as The Guardian reports, there was a United Nations climate change summit in Poland, and Attenborough was chosen to be the one representative speaking for the world’s people as a whole. That’s a big responsibility! And he’s 92 years old.

As part of that summit, and to inform Sir David’s address, messages from many people were collected. Buttressed by their views…

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ASTROLOGY – 1

                           ASTROLOGY - 1                            
            The human has to get birth and the last destination is death, in this span of life to death average human fights for whole life to gain and the main things to fetch is what? 
            1st is to get maximum he can make available for himself whatsoever he can visualize, the best one of each in the shape of money-power-enjoyments etc so on. That is called profit, But everyone can't get at all. there may be so many remain empty hand, it is up to Him (unknown to the layman, still).
           2nd is name-fame n to avoid defame, it also in the hand of Him.
and
           3rd is to live longer but death is the last destination for all, it is not in the hand of living on how much longer he can live, exceptions in India the spiritual worlds' master are in Himalaya are living more than hundred-thousand years. 
            We the pitiable human from birth to death try most for us - may get ''profit or loss''   /  fame or defame  /and to live as much we want to live. It is not possible for everyone because there is a remote behind us, under His control.
           If someone goes to search Him but it is not possible for everyone though it is too, easy, as regards the basic concept of Vedic. Every respectable soul had appeared on earth, having that technic given in our old scriptures more than 5000 yrs before or older time, it is subject of research.
           Every one on this earth is in search of peace and bliss but they forget the game they have played in their life or before birth (you're a reincarnation of last birth whatsoever it may be) you're facing in present and the game you're playing in this birth will project in your future.
          People go to Astrologers whose search is money, they don't give you any authentic guideline which can solve your questions or problems because they himself are miss-understood. They don't know even their own future. They are meant for Astrology so they are serving people to earn money, they are, too, under control of His remote, later on, they become mad or left this work. 
           As regards Astrology I have a long experience and become a victim of it. I collect knowledge and found that average maximum 60% result may help you but not certain. So many Astrologer gives you a sweet toffee, nothing else. Average it is a study of the psychology of the client.
          But as long I go ahead to know the fact, through a temple when my last Astrologer indicates me to go to one temple of Ganesh, that is to be decided by me that one temple. I decided to worship the Lord, who gave me that guideline indirectly through chances and so many knowledge of Aryan scriptures, just like the great pioneers of Vedic spiritual science and books of seers and which has a real study of human nature. Manu Smriti and Shrimd Bhagawd Geeta, Shrimd Bhagawd Puran have explained the few basic ways of human working and thinking including ultimate results of the acts (the Karma through thinking-speaking-acting in way of life), too. In the last chapter of Shrimd Bhavwd Puran ends with the proclamation of Lord Krishna " what decision you have taken and have acted in present you have to face the result in future of the same, good or bad, no one can help you to change it." 
          It makes one thing clear to me and helps me to understand when I read the book translated in the English language by late Shri Maheshanand Ji Maharaj a saint " Brahm Sootra with interpretation " of Adi Shankaracharya which was Sanskrit to Sanskrit. It has so many examples and a condensed view is "This world around us is just like a movie and we ourselves are the part of it and you can't change the link of stories around us". Those who are above the average human can know the whole film of past-present n future. But it is also a fact that every soul of every human and living creatures know their past-present and can know future but they are not in the position to do so, many times so many people speak out after seeing present situation that it was near about in my knowledge that it will happen in future and it is happening today. In the same manner, every human is in this position but they can't know and explain in such manner as the seers can. So to know yourself please try to understand our scriptures. If someone read only one original scripture with complete faith and eagerness he will reach the level of intelligent student and after being conditioned of that knowledge he will proceed toward the real goal.
             One thing I want to make clear don't plead or oppose for any belief which followed by you or not and someone follows other than yours. Every great soul (Prophets-Seers-Guru) have given guidelines to their followers "the same knowledge which is understood by them, the way may differ must target is to let people know Him, not to be attached with any way you follow.
        I will finish my blog with the reference of Acharya Rajneesh. He speaks in his lecture "someone (Great souls) said that is the moon indicating by his hand toward the moon, it is bad luck of us we never try to see and understand the moon but we are hanging around the hand of the great soul." 
        As I always say God is one, we have given Him name according to our language that not means God is different as regards language or way of worship and dress code.
       Best of Luck for all who are reading or viewing or not.                

Mystic Pilot

Mystic Pilot

    As regards the title of my blog I want to explain that we all around the earth are under the control of a remote of unknown power which controls over our acts, decisions we take in life from birth to death. Whenever we try to do something there are some obstacle arises at once and we feel so disappointed but there is a new command of that remote controller. We can’t understand that and feel disappointed. There is a way to understand that. We are appointed here on earth for certain work as mystic pilot says ” I will devote myself for the peace on earth. As Acharya Rajnish says that ” He (unknown power) had sent so many messengers on this earth to guide the human race to follow Him not worldly affairs ” but unfortunately human race is following religions which were framed by followers and He (unknown power) was ignored. The religions become most important and that’ why they’re great struggles were happen in the history of human race. You will wonder that some greedy persons who have been so-called leaders of religions, societies, states, nations or DNA have created such struggles. The layman is can’t think over what command is given by leaders but they follow them with blind faith unknowingly the fact. Religion is a way of life, not a spiritual way. It can let us reach to the spiritual level if we become unattached to the worldly affairs.

   There are so many scriptures of Aryan of India that has explained it in so many angles through Shrimd Bhagavad, Manu-Smriti, shrimd Bhagavad Geeta etc. I will give you some examples of these scriptures.

   I have so many blogs related to these subjects, anyone interested to know the fact of human race may read them.

My blogs are social-economy,religions,human’s welfare in all sense. There is way to save earth n human,too. Development of physical world is harmful. Spiritual development is the target of my blogs

Why there are Disasters on earth ?

It is fact that Christ appeared on earth to save Humanity but people fetch him but not following in real sense because His message of “Love” means love for all living and none living (as understand about nature) is ignored Why not we come back to nature and stop the materialistic progress live with Him, the real father of us that is explained and understood in different names and symbols but He is one. He has a too much soft heart for us but we are too much cruel in all sense. We are fighting for ”My-Me-Mine” but the reality is that nothing is yours’, this nature is a gift of Him for all in equal shares but some greedy persons are destroying it for the sake of “My-Me-Mine” that’s why whole earth and human beings are facing natural disasters around the world.

m.jahangeer Sootradhar

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Dec 3, 11:41 PM
It is fact that Christ appeared on earth to save Humanity but people fetch him but not following in real sense because His message of “Love” means love for all living and none living (as understand about nature) is ignored Why not we come back to nature and stop the materialistic progress live with Him, the real father of us that is explained and understood in different names and symbols but He is one. He has a too much soft heart for us but we are too much cruel in all sense. We are fighting for ”My-Me-Mine” but the reality is that nothing is yours’, this nature is a gift of Him for all in equal shares but some greedy persons are destroying it for the sake of “My-Me-Mine” that’s why whole earth and human beings are facing natural disasters around the world. from 1988 the newspaper fortnightly is writing over this issue but no one gives him support by India Govt as well as whole world government Now UNO have warned over the same issue few people are calling to do something otherwise the present civilization will reach to its end. Wish you the best of luck.
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what is my purpose

I am writing over scriptures of our national history of religion which is the safest way of living on this planet. As regard the warning of U.N.O and late scientist Stiphen Hekin’s warning that this earth is about to end within years and I will try my best to make agree every one to follow certain rules of our scriptures of India and see the miracles. View all posts and come the to conclusion.

It is easiest way for me to write in my national language about such subjects, If there are any Q. related the subject plz. contact or email me – krishnansh771@gmail.com, thanks in advance.

yours’

M.Jahangeer